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August 2025

Ganesh Chaturthi 2026 Kab Hai Janen Puja Vidhi, Muhurat aur Poori Jankari

Ganesh Chaturthi 2026 Kab Hai? Janen Puja Vidhi, Muhurat aur Poori Jankari

गणेश चतुर्थी 2026 (Ganesh Chaturthi): तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथाएँ और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव की संपूर्ण जानकारी गणपति बाप्पा मोरया! यह पावन उद्घोष एक बार फिर गूंजने को तैयार है। गणेश चतुर्थी, भगवान गणेश के जन्मोत्सव का यह महापर्व, भारतवर्ष में बड़े ही धूम-धाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, कला और एकता का भी प्रतीक है। यदि आप गणेश चतुर्थी 2026 (Ganesh Chaturthi 2026) की तैयारी कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक विस्तृत गाइड की तरह काम करेगा। इसमें आपको तिथि और शुभ मुहूर्त से लेकर पूजा विधि, पौराणिक कथाएँ और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव मनाने के तरीके तक, हर ज़रूरी जानकारी मिलेगी। गणेश चतुर्थी 2026: कब है? (Ganesh Chaturthi 2026 Date and Time) सबसे पहले, आइए जानते हैं कि साल 2026 में गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी: नोट: शुभ मुहूर्त और तिथि आपके स्थान के सूर्योदय और पंचांग के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है। गणेश चतुर्थी: पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व (Mythological & Historical Queries) गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) मनाने के पीछे कई रोचक कहानियाँ और ऐतिहासिक संदर्भ हैं: घर पर गणेश चतुर्थी की पूजा विधि (Ganesh Chaturthi Puja Vidhi at Home) आप घर पर भी सरल विधि से भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं: उकडीचे मोदक कैसे बनाएं? (How to make ukadiche modak) उकडीचे मोदक गणेश चतुर्थी का एक महत्वपूर्ण प्रसाद है। इसे बनाने की विधि यहाँ दी गई है: सामग्री: विधि: घर पर बनाएं इको-फ्रेंडली गणेश मूर्ति (DIY eco friendly ganesha idol) पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, इस बार घर पर ही मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाएं: गणपति सजावट के आसान तरीके (Ganpati decoration steps) अपने घर को सुंदर और भक्तिमय बनाने के लिए कुछ आसान सजावट के विचार: प्रेरणादायक और रचनात्मक विचार (Inspirational & Creative Queries) सततता और पर्यावरण (Sustainability Queries) सामान्य प्रश्न और विशिष्ट जानकारी (FAQ & Specific Knowledge Queries) कला और भक्ति का संगम: मनमोहक गणपति सजावट More images conclusion यह विस्तृत ब्लॉग पोस्ट आपको गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) 2026 की तैयारी करने और इस पावन पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाने में मदद करेगा। आइए, मिलकर अपने प्यारे बाप्पा का स्वागत करें और उनसे सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें। गणपति बाप्पा मोरया! Related Blog When is Krishna Janmashtami

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कृष्ण जन्माष्टमी - krishna janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी 2025 तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा और संपूर्ण जानकारी

Krishna Janmashtami 2025 – तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा और संपूर्ण जानकारी

मुख्य शीर्षक: कृष्ण जन्माष्टमी( Krishna Janmashtami ) वह सब कुछ जो आपको जानना आवश्यक है| श्री कृष्ण जन्माष्टमी, जिसे केवल जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी भी कहा जाता है, भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत और विश्व में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों को सजाते हैं, कृष्ण लीलाओं का मंचन करते हैं और मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का जश्न मनाते हैं। आइए, इस दिव्य त्योहार के हर पहलू को विस्तार से जानें ताकि आप इसे पूरे विधि-विधान और भक्ति-भाव के साथ मना सकें। इस ब्लॉग में आप जानेंगे: कृष्ण जन्माष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Krishna Janmashtami 2025 Date and Time) साल 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शनिवार, 16 अगस्त को मनाया जाएगा। यह तिथियां और समय विभिन्न पंचांगों के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं, इसलिए अपने स्थानीय पंडित से पुष्टि करना उचित है। घर पर जन्माष्टमी की सरल पूजा विधि (Krishna Janmashtami Puja Vidhi at Home) घर पर जन्माष्टमी का पूजन करना बहुत ही फलदायी माना जाता है। यहाँ एक सरल विधि दी गई है: पूजा सामग्री की सूची: पूजा के चरण: Krishna Janmashtami श्री कृष्ण जन्म कथा (Krishna Janmashtami Katha) द्वापर युग में, मथुरा का राजा कंस एक अत्याचारी शासक था। उसने अपने पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर सिंहासन हड़प लिया था। कंस अपनी चचेरी बहन देवकी से बहुत स्नेह करता था और उसका विवाह वासुदेव से कराया। जब वह देवकी को विदा कर रहा था, तभी एक आकाशवाणी हुई, “हे कंस, देवकी की आठवीं संतान ही तेरी मृत्यु का कारण बनेगी।” यह सुनकर कंस भयभीत हो गया और उसने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया। उसने एक-एक करके देवकी की सात संतानों को जन्म लेते ही मार डाला। जब देवकी आठवीं बार गर्भवती हुईं, तो कारागार में कड़े पहरे लगा दिए गए। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी की घनघोर अंधेरी रात में, रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। उनके जन्म लेते ही कारागार में दिव्य प्रकाश फैल गया, पहरेदार सो गए और वासुदेव की बेड़ियां खुल गईं। भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि वे इस बालक को तुरंत गोकुल में अपने मित्र नंद बाबा के घर छोड़ आएं और वहां जन्मी कन्या को यहां ले आएं। वासुदेव ने बालक को एक टोकरी में रखकर उफनती यमुना नदी को पार किया। शेषनाग ने स्वयं फन फैलाकर बालक को बारिश से बचाया। वासुदेव ने कान्हा को यशोदा मैया के पास सुला दिया और कन्या को लेकर वापस कारागार आ गए। कंस ने जब उस कन्या को मारना चाहा, तो वह बिजली बनकर आकाश में उड़ गई और भविष्यवाणी की, “तुझे मारने वाला तो गोकुल में पहुंच चुका है।” अंततः, श्री कृष्ण ने बड़े होकर कंस का वध किया और पृथ्वी को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। जन्माष्टमी के विशेष भोग और व्यंजन (Krishna Janmashtami Special Recipes) जन्माष्टमी का व्रत फलाहार और विशेष व्यंजनों के साथ किया जाता है। कान्हा को भोग लगाने के लिए कुछ प्रमुख व्यंजन हैं: जन्माष्टमी की शुभकामनाएं (Happy Krishna Janmashtami Wishes in Hindi) इस पावन अवसर पर अपने प्रियजनों को यह शुभकामनाएं भेजें: निष्कर्ष – Krishna Janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, धर्म, और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। यह दिन हमें भगवान कृष्ण की शिक्षाओं को याद दिलाता है, जो आज भी प्रासंगिक हैं। इस जन्माष्टमी, आप पूरे भक्ति भाव से कान्हा का जन्मोत्सव मनाएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। !! जय श्री कृष्णा !! Other Important Blog Why Janmashtami Holds a Special Place in Our Hearts

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